के अपने निवास का स्थान भी इसी में है जो कि थोड़ी ही जगह में हैं। शिवाजी इसी किले के अन्दर थे जिस समय उन्होंने अफ़ज़ल खां की सेना देखी दिल में विचारा कि इस बड़ी सेना से सामना करना निष्फल है। अतएव सन्देशा भेजा और अत्यन्त नम्रता से क्षमा-प्रार्थना की । इस पर अफ़ज़ल खां ने एक गोपीनाथ ब्राह्यण को शिवाजी के पास भेजा कि यदि शिवाजी अफ़ज़ल खां इस बात का जिम्मा ले सकता है कि शिवाजी को बादशाह से मिला कर क्षमा दिला दिया और उसके साथ यह सम्मति की कि किसी प्रकार से अफ़ज़ल खां को एकाकी मिला देवे और यह भ्ज्ञी कहला भेजा कि यदि आप निःसन्देह सच्चे हैं और आपकी भावना में किसी प्रकार का पाप नहीं हैं तो स्वयम् अकेले किले के निकट आ कर मुझ से मिलिए और शपथ खाइये कि आप किसी प्रकार का धोखा मेरे साथ न करेंगे। मुसलमान लेखक लिखते हैं कि ऐसा सन्देश शिवाजी ने ब्राह्यण द्वारा भेजा था और अफ़ज़ल
उसने फतेहखां को गिरफ्तार करने का प्रबन्ध किया । जब फतेहखां हाथ में आ गया तब महाबतखां ने ठानी कि शाहजी भोंसले को जीतना चाहिए क्योंकि तभी बीजापुर व अहमदनगर पूर्ण रूप से अपने हाथ में आ जायेंगे। परन्तु मुसलमानी सेनापति ने सब से पहले यह काम किया कि शाहजी भोंसले की स्त्री और पुत्र को जो नीरापुर के निकट ठहरे हुए थे गिरफ्तार करने का प्रयत्न किया। एक मुसलमान सेनानायक ने धोखा देकर उनको गिरफ्तार भी किया परन्तु जब मराठा सरदारों ने यह समाचार सुना तो जमानत