होकर अपने विश्राम भवन से निकला। जिस समय शिवाजी से बगलगीर होने की इच्छा से अफ़ज़ल खां आगे बढ़ा और पास जाकर शिवाजी का माथा पकड़कर जोर से दबाना आरम्भ किया और झट म्यान से तलवार निकाल शिवाजी पर चलाई, (परन्तु शिवाजी के बदन पर जो सज्जो आदि वस्त्र थे उसके कारण तलवार कुछ कार्य न कर सकी) तो शिवाजी ने अत्यन्त चतुरता के साथ बायें हाथ में लगा हुआ बिछूआ (बघनखा) अफ़ज़ल खां की आंतड़ियों में घुसेड़ दिया। अफ़ज़ल खां वहीं ढेर हो गया। उसका शरीर एक पहाड़ी पर दबा दिया तथा उसके सिर पर एक बुर्ज बनवा दिया जो अब भी वहां पर मौजुद है और ’अब्दुल्ला का मीनार’ के नाम से प्रसिद्व है। अफ़ज़ल खां का असली नाम अब्दुल्ला था।
थ्वचार करने से ज्ञात होता है कि मरहठा लेखकों का वर्णन किया हुआ इतिहास इस विषय में ’खाफीकी खां’ के इस लेख की अपेक्षा सत्य और ठीक है। जिसे
चुका था। बीजापुर के बादशाह ने ऐसे मनुष्य को अपनी सहायता के लिए रखना बहुत अच्छा समझा और पूना का प्रान्त उसकी जागीर में मिला कर दे दिया। कुछ समय बाद कोन्हार, बंगलोर, रोस, कर्टा, बालापुर और सेरा कुछ समय बाद बरार प्रान्त में 22 देहात की देशमुखी भी उनको दे दी गई। इस प्रकार और बहुत से इलाके शाहजी भोंसले को थोडे़ ही समय में प्राप्त हो गये।
अध्याय 2
शिवाजी का जन्म और बाल्यकाल
सन् 1616 ई. में शाहजी भोंसले के घर शिवनेरी नाम के किले में शिवाजी