पढ़ते समय तत्काल निश्चय हो जाता है िकवह पक्षपात-पूर्ण तथा मिथ्या है क्योंकि यह कभी सम्भव नहीं हो सकता िकइस सलूक के पश्चात् (जो कि शिवाजी के साथ दरबार बीजापुर की ओर से काम में आया था और उस विरोध के पश्चात् जिसे शिवाजी ने बीजापुर के राज्य के विरूद्व खड़ा किया था) अफ़ज़ल खां शिवाजी पर पूर्ण विश्वास करके मित्र भाव से इस प्रकार अपने आप को शत्रु के हाथ फंसा देता। दरबार बीजापुर ने
छत्रपति शिवाजी 61
शिवाजी के पिता को कैद करके अत्यन्त दुष्टता का बर्ताव किया था। इसके अतिरिक्त अफ़ज़ल खां इस प्रस्थान तथा आक्रमण के मार्ग में सम्पूर्ण मन्दिरों को विध्वंस तथा नष्ट भ्रष्ट करता आया था । अफ़ज़ल खां ने ही शिवाजी के पुत्र शम्भा जी को धोखेबाजी से कत्ल किया था। यह बात अफ़ज़ल खां को भली प्रकार ज्ञात थी कि शिवा जी कट्टर हिन्दू है और उन्हें अपने धर्म की मानहानि तथा देवताओं के अनादर से अत्यन्त
का जन्म हुआ। जिस समय शिवाजी का जन्म हुआ था एस समय शाहजी भोंसले लड़ाई के मैदान में डटे हुए थे। सब से विचित्र बात यह थी कि एक सेना की रतफ से शाहजी थे तो मुकाबले में दूसरी तरफ उनके श्वसुर यादवराव लड़ रहे थे जिसका फल यह हुआ कि थोड़े ही समय में शिवाजी के पिता और माता में मन®मालिन्य बढ़ गया। फल स्वरूप सन् 1630 ई. में शाहजी ने दूसरी शादी कर ली जिससे जीजीबाई मुसलमानों के कब्जे में फंस गई। वह अपने पिता के एक सम्बन्धी के साथ थी। शिवाजी पर कोई आपत्ति न आ सकती थी क्योंकि इस उसने अलग छिपा रखा था।