से शिवाजी की शक्ति और भी बढ़ गई और थोड़े ही समय में अन्य कई किलों पर भी उनका अधिकार हो गया। बीजापुर के दरबार ने अफ़ज़ल खां की मौत का समाचार पाकर ’रूस्तनेज खां’ को आज्ञा दी िकवह कोल्हापुर को बचाने के लिए सेना लेकर जाये परन्तु शिवाजी ने उसे भी आक्रमण करके परास्त कर दिया। इसके पश्चात् शिवाजी ने सीधा राजपुर (जहां अंगे्रजों की बस्ती थी) का मार्ग लिया और वहां से ’कर’ तथा ’भेंट’ लेता हुआ ’बहिल’ पर अधिकार जमा लिया। वहां से उन्हें
छत्रपति शिवाजी 63
बहुत सी सम्पत्ति प्राप्त हुई जो तुरन्त राजगढ़ कर दी गई। जब राजा को इस बात का समाचार मिला कि शिवाजी विजय प्राप्त करते हुए और नगरों तथा गावों में अपना अधिकार जमाते हुए सीधे हमारी तरफ आ रहा है तब मुसलमान बादशाहों के कान खड़े होने लगे और वे सामना करने की तैयारियां करने लगे। ’बहशी गुलामसीदी जौहर’
जिस समय मुरार पन्त ने बच्चे शिवाजी की यह भोली बात सुनी तो आश्चर्य करने लगा और उसके माता पिता को समस्त समाचार सुनाया। माता पिता दोनों ने बच्चे को समझाया कि यह समय ऐसी बातें करने का नहीं है। इस समय मुसलमानों का आधिपत्य है। उनके बादशाह को सलाम करना हमारा फर्ज है। इस प्रकार समझा बुझा कर शिवाजी को दरबाार में ले गये परन्तु वहां जाकर शिवाजी ने बादशाह को सलाम नहीं किया। शाहजी और मुरारपन्त ने यह कह कर बात टाल दी कि अभी ’बच्चा’ है दरबार