कार्यवाही में जब ’सीदी जौहर’ की सब तरकीबें खा़क में मिल गई तो वह इस उधेड़बुन में पड़ गया कि वह ’पलाना’ के घेरे पर स्थित रहे अथवा शिवाजी के पीछे जाये। इधर जब बादशाह को यह समाचार मिला तो उसने ’सीदी जौहर’ पर यह दोष लगाया कि उसने शिवाजी से रिश्वत ले ली है जिसे सुनकर वह क्रोध स ेजल उठा और वैसा ही उसने उत्तर लिख भेजा जो बादशाह के लिए बड़ा अनादर सूचक था। अन्त में बादशाह स्वयं युद्व करने के लिए चल पड़ा। पलाना का किला पावनगढ़, आंगन और विशालगढ़ तथा आसपास के किले जो शिवाजी ने ले लिये थे बादशाह के
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हाथ आ गये। इतने में वर्षा आरम्भ हो गई। बादशाह ने कृष्णा नदी के किनारे ’’चमलगे’’ स्थान पर अपना खेमा जमा दिया। शिवाजी ने यद्यपि बादशाह का सामना नहीं किया परन्तु फिर भी वह चुपचाप नहीं रहा। वर्षा के प्रारम्भ में
तक पहुंची। इसकी रोक के वास्ते जागीर का बहुत बड़ा हिस्सा शिवाजी को सौंप दिया गया। इससे इतना प्रभाव पड़ा कि दिन भर वह कहीं बाहर न जाने लगे परन्तु जो चीज उनकी प्रकृति में मिल गई हो वह कैसे दूर की जा सकती थी? शाहजी की जागीर में कोई दुर्ग नहीं था इसलिए आत्मरक्षा और धर्मरक्षा के लिए किसी दुर्ग का होना अत्यन्त आवश्यक था। शिवाजी के मस्तिष्क में यह विचार रह रह कर जोश मारने लगा कि किसी तरह कोई किला हाथ आवे। हम पहले लिख चुके हैं कि मावली लोगों के चित्त को