वह ’राजापुर’ के सामने जा उपस्थित हुआ और उसने उस नगर को लूटा। इस अवसर पर अंगे्रजो की भी कुछ हानि हुई और कई एक बड़े कारखाने वाले पकड़ कर कैद कर लिये गये। शिवाजी को इन पर सन्देह हो गया था कि इन्होंने ’पलाना’ के घेरे के समय शत्रुओं को बारूद और गोली की सहायता दी थी। शिवाजी को उस समय यह ध्यान न था कि यही अंगे्रज व्यापारी शीध्र ही भारतवर्ष के स्वामी बन जायेंगे और शिवाजी की सन्तान उनके आधीन एक कर देने वाले साधारण मण्डलेश (राजा) से अधिक कीर्ति वाली न रहेगी।
शिवाजी को यह ध्यान न था कि यवन राज्य के नाश होने से उनकी जाति का कुछ लाभ न होगा किन्तु एक दूसरी ही जाति यवनों के नष्ट होने से लाभ उठायेगी और सिंहासन पर अपना आधिपत्य जमा लेगी। राजापुर से निकल कर शिवाजी ने एक हिन्दू राजा ’दलवी’ की उपजाऊ भूमि पर आक्रमण किया और उसकी
तो शिवाजी पहले ही वशीभूत कर चुके थे और देश के दुर्गम मार्ग शिकार खेलने के समय ही देख चुके थे। अतएव किसी किले को प्राप्त करना शिवाजी के लिए कोई कठिन काम न था। वह अपने मन की तरंग में सब कुछ कर सकते थे।
पूना में पश्चिमी भाग में करीब 20 मील की दूरी पर ’तोरण’ नामक पहाड़ी किला था। इस किले का मार्ग बहुत कठिन और दुर्गम था। शिवाजी ने अपने मावली साथियों की सहायता से तोरण किले के अध्यक्ष से परिचय प्राप्त किया और उसको किसी प्रकार इस बात पर