छत्रपति शिवाजी 73
उस समय ठीक बन चुका था, आ पहुंचे। उस समय अंगरेज और डच लोगों ने अपनी बस्तियों को बहुत मुश्किल से बचाया नही ंतो और भी बहुत सा धन हाथ आता। लौटने पर शिवाजी को समाचार मिला कि उनके पिता शिकार खेलते समय घोड़े पर से गिर जाने के कारण मर गये। ’शाहजी’ की मृत्यु सुन कर शिवाजी पित्शव की अन्त्येष्टिक्रिया में लग गये। इस काम से छुट्टी मिलने पर शिवाजी ने कुछ दिन तक राज्य का प्रबन्ध किया। इसी अवसर पर उन्होंने अपने लिए राजा की पदवी तजबीज की और अपने नाम का सिक्का चला दिया। इस प्रकार 20 वर्ष के भीतर एक यवन राज्य के जागीरदार के होनहार पुत्र ने केवल बुद्विमत्ता और ईश्वरप्रदत्त शक्ति एवं वीरता से अपने और जाति के शत्रुओं से लड़ भिड़ कर और मार काट करके एक हिन्दू राज्य की नींव डाली और अपने आपको पहला हिन्दू राजा बनाया।
औरंगजेब
गद्दी पर बैठ गया और किलेदार बन बैठा। दोनों छोटे बेटों ने अपनी मदद के लिए शिवाजी की शरण ली । इस बहाने शिवाजी ने अपनी बड़ी सेना साथ ले पुरन्दर किले के नीचे डेरा जमाया। सब भाइयों ने शिवाजी को उनके कई सरदारों के साथ किले में रहे और मौका पाकर रात में बड़े भाई को कैद कर लिया और शेष दो भाइयों और किला निवासियों को अपनी तरफ मिला लिया। इस कुटनीति से किले को अपने वश में करके बदले में बहुत सी जागीर उन तीनों भाइयों को दे दी और तीेनों को अपनी सेवा में रख लिया।