जैसा बलवान् सम्राट् बड़े बडे़ वीर राजपूतों के सहायक होने पर भी एक नये उठते हुए सितारे की उन्नति का अवरोध न कर सका। अवरोध करना तो दूर रहा, शाही सेना के मुकाबले शिवाजी को बहुत से अवसर अपनी वीरता ओर धीरता और बुद्विमत्ता के दिखलाने के मिले। शिवाजी ने अपने शत्रुओं पर यह सिद्व कर दिया कि जो मनुष्य मरने मारने के लिए उद्यत हो वह एक ऐसा बलवान् मनुष्य हो जाता है जिससे बड़े बड़े राज्य भयभीत होते हैं और कभी कभी उजड़ भी जाते हैं। उसने अपने कामों से सिद्व कर दिया कि 16वीं शताब्दी के हिन्दुओं में भी कुछ महाभारत और रामायण काल के हिन्दुओं का रक्त शेष था। यद्यपि सामान्यतया उनका रक्त बिगड़ कर सड़ने लग गया था। परन्तु फिर भी जरा सी चोट के लगने से ज्वालामुखी पर्वतों के समान उबल पड़ता था। और प्रमाद में अन्धे होकर बैठे रहें तो मुद्दतों चूं न करें, चाहे इधर की
निदान उसने बहुत ही थोड़े समय में बिना किसी प्रकार की लड़ाई के समस्त जागीर अपने हाथ में करली जो इस समय महल और कबरें बनाने के धुन में था। और इसका सेनापति शाहजी कर्नाटक की लड़ाई में था और घूम घूम कर दौरा कर रहा था।
अध्याय 3
शाहजी का कैद होना और छुटकारा
21 वर्ष की अवस्था तक जो कार्य शिवाजी ने किये हैं वह ऊपर लिखे जा चुके हैं। स्वतन्त्रता और राजपाट की प्रबल अभिलाषा ने शिवाजी को धन जमा करने की सुबुद्वि दी। वह नवीन युद्वों के लिए