में लगा है और कदापि सम्भव नहीं कि वह शिवाजी को सुख से राज्य करने दे, तिस पर भी तुर्रा यह कि शिवाजी के एक अफसर ने कम्का जाने वाले मुसलमानों का जहाज लूट लिया और सम्पूर्ण यात्रियों से दण्ड के तौर पर पुष्कल धन लेकर छोड़ा। दिल्ली के बादशाह औरंगजेब को भी यह विचार न आया था कि कदाचित् कोई हिन्दू राजा भी मुसलमानों से दण्ड लेने की शक्ति रखता है। यह सुन कर कि एक बेअदब और धूर्त मरहठे ने मक्का जाने वाले एक जहाज को लूट लिया है। औरंगजेब को बड़ा क्रोध आया और उसने शपथ खाई कि जब तक उस टेढ़े नेत्र वाले अभिमानी हिन्दू का सिर न काट लूंगा तब तक चैन नहीं लूंगा। परन्तु ईश्वर की लाला ईश्वर के सिवा कौन जान सकता है क्योंकि न तो औरंगजेब सर्वशक्तिमान् था और न उसे इन बातों का ही ज्ञान था।
अध्याय 7
महाराजा शिवाजी के अन्य कार्य
अगस्त सन् 1665 ई. में शिवाजी
समाचार मिला कि मुल्ला अहमद ( कल्याण का अध्यक्ष) ने एक बहुत बड़ा खजाना बिहार की ओर भेजा है त बवह 200 सवार लेकर चल पड़ा और उसे लूट लिया। जिस समय इस लॅअ की ख़बर बीजापुर पहंुची उसी समय यह ख़बर भी मिली कि शिवाजी ने निम्नलिखित किलों पर कब्जा कर लिया। कंगोरी-टोगटकोन-भोरप-कादरी लोहगढ़ और राममोची। इनके अतिरिक्त शिवाजी के आदमियों ने ताला, गोशाला और ’राइरी’ नाम के ग्रामों पर भी अपना अधिकार कर लिया और कोंकण केक इलाके के बहुत से शहरों को लूट कर राजगढ़ में बहुत सी सम्पत्ति एकत्रित कर ली है।