फिर अपने शत्रु को परास्त करने के लिए रवाना हुए और पहले ’’पटहव-अहमद नगर’’ को लूटा और फिर औरंगजेब के आसपास को निष्कण्टक किया। विजयपुर की सेना ने प्रतिज्ञा-पत्र को तोड़ कर ’कोंकण’ पर आक्रमण किया था। इसीलिए शिवाजी भी इस जोड़ तोड़ में बिजली के समान कभी यहां कभी वहां जा निकलते थे। अंगे्रज निरीक्षकों ने लिखा है कि शिवाजी की चेष्टाएं ऐसी चुस्त और तीक्ष्ण होती थीं जिसके कारण वे प्रत्येक स्थान पर दिखाई दिया करते थे। लोग समझते थे कि शिवाजी उत्तर दिशा को जा रहे हैं परन्तु फिर पता चलता िकवह तो दक्षिण में जा पहुंचे। आज एक स्थान, कल देसरे स्थान में, परसों दूर एक तीसरे स्थान पर, सारांश यह कि वह ऐसी फुर्ती से काम करते थे कि शत्रु देख कर चकित हो जाते थे । वहे सदैव इसी विचार में रहते थे कि वह (शिवाजी) कोई मनुष्य है अथवा भूत-प्रेत। उनका समाचार प्रबन्ध
शिवाजी के साथ साथ दादाजी कोंड़देव ने जिन लड़कों को शिक्षा दी थी उनमें से एक का नाम आवाजी
छत्रपति शिवाजी 47
सेमदेव था जो केवल वीर ही नहीं बल्कि धीर, चतुर और तीक्ष्ण बुद्वि का भी था। इसी ने ’कल्याण’ पर चढ़ाई करके मुल्ला अहमद को कैद किया था। बस इतना होते ही इस इलाके में जो किले थे सब सोमदेव के हाथ आ गये। इस बात पर शिवाजी बहुत खुश हुआ और ’कल्याण’ पहुंच कर उसने बहुत सा धन और माल ’सोमदेव’ को दिया और उस इलाके का सूबेदार बना