(डाक विभाग) ऐसा पूर्ण और सच्चा था कि शिवाजी के पास शत्रु के घर के समाचारों का एक एक अक्षर ठीक ठीक और समय पर पहुंचाता था।
सामने मैदान में सारी शाही सेना पड़ी है, एक ओर विजयपुर की सेना धमकियां दे रही है। आपने यह प्रसिद्व कर दिया कि हम शाही सेना पर आक्रमण करेंगे और अगले दिन झट अपने समुद्री बेड़े में (जिसमें 85 छोटी छोटी नावें और तीन बड़़े जहाज थे) सवार होकर ’वार्सलीवर’ नगर में आ पहुंचे जो
76 छत्रपति शिवाजी
’गोवा’ से मील दूरी पर था और लूट मार के बाद 4000 मनुष्यों को साथ लेकर किनारे से बहुत दूर जा निकले। अब शत्रुओं को ज्ञात हुआ कि शिवाजी अपनी राजधानी में नहीं हैं। फिर क्या था, इधर उधर तलाश होने लगी। अभी दुश्मन पता भी न लगा सके थे कि मान्यवर महोदय बिजली के समान कड़कते हुए अपने स्थान पर आ विराजे और अपनी सेना
दिया। वह बड़ी चुतरता के साथ इलाके का प्रबन्ध करने लगा। मालगुजारी का प्रबन्ध देश की पुरानी रीति पर करना शुरू किया। उन जागीरों को जो हिन्दुओं के मन्दिरों और तीर्थ स्थानों की थी और जिन्हें मुसलमानों ने छीन लिया था, हिन्दुओं को वापस करा दिया। इनके सिवाय ’गोशाला’ और ’राइरी’ के पास किले बनवाने शुरू कर दिये। दो किले बने एक ’भर्दारी’ और दूसरा लंगाना’। मुल्ला अहमद से (जिसको आवाजी सोमदेव ने कैद किया था) शिवाजी बड़ी प्रतिष्ठा के साथ मिला और उसको कैद से छुड़ा दिया। वह