जब तक कि उसमें अपने ही देश के साथ घात करने वाले देशद्रोही पैदा न हो। ऐसे देशद्रोही देश का उद्वार करने वाले लोगों के मार्ग में बाधक बनते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि देशद्रोहियों का बल न बढ़ने पाए ज्यों ही ये सर उठाएं, उनको कुचल दिया जाये। इस प्रकार देश के उद्वारक ऐसे काम भी करते हैं जिससे देशद्रोहियों का विनाश हो। ऐसा करने में उनका स्वार्थ नहीं होता, अपितू वे शत्रु की शक्ति को नष्ट करने के लिए ही ऐसे काम करते हैं। योरोपियन सेनापति इन कामों को कत्र्तव्य समझ कर करते हैं, किन्तू अन्य लोग उस कार्यवाही को लूटपाट या डाका डालना कहते हैं। जब आजकल की सभ्य जातियों का यह सच है तो हम मुसलमान लेखकों को क्यों दोष दें?

यह सब तो प्रसंगवश लिखना पड़ा। वास्तविक प्रश्न यह है कि हम अपने अवनति के इतिहास को कहां से पढ़ना शुरू करें? प्रथम तो हमें इन कारणों का


14 of 229

में बौद्व धर्म ईसाई मत के आविर्भाव से पहले उत्पन्न हो चुका था। अतः यह स्पष्ट है कि ईसाई मत की उत्पत्ति बौद्व मत से हुई है। आर्यों के मान्य ग्रन्थ वेद संसार के प्राचीनतम धर्मग्रन्थ हैं। इसी तथ्य से यह सिद्व हो जाता है कि आर्य जाति संसार की प्राचीनतम जाति है। इस जाति में पाई जाने वाली विद्या, इसका धर्म तथा इसकी सभ्यता ही इसके प्राचीनतम होने के प्रमाण हैं।

जिस जाति ने गाणित और ज्योतिष विद्या का गूढ़तम

विज्ञप्ति 9

अध्ययन किया वह आज अधोगति को प्राप्त हो गई है। जिस


14 of 378