आदतों से घरों को लूटना और स्त्रियों को पकड़ना आरम्भ कर दिया है। मरहठे वीरों की क्रोधाग्नि भभक उठी और सबों ने निशाना लगा कर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमला करने वाले शत्रुओं के शव ढेर होने लगे शेष सब अपनी अपनी जान लेकर भाग निकले। उसी समय ’मावलियों’ का एक समूह अपने अध्यक्ष के साथ नीचे उतर आया और तलवारें खींच, कसम खाता हुआ शत्रु पर टूट पड़ा, जो जो सामने आया बसको मार गिराया। बचे खुचे अपना प्राण लेकर भाग गये। दिलेर खां की सारी सेना पहाड़ी पर धर कर स्वंय मृत्यु की मूर्ति बन रहे थे दिलेर खा हाथी पर चढ़ा हुआ पहाड़ी के नीेचे से सब घटनाएं देख रहा था और नीचे से ही अपनी आज्ञा दे रहा था।
जब दिलेर खां ने देखा कि यहां तो बना बनाया खेल बिगड़ा जा रहा है तो अपने साथी पठानों को लेकर पुकारता हुआ और उत्साह बढ़ाता हुआ आगे बढ़ा। वीर मरहठे यह
हजारी का पद देना स्वीकार किया। शाहजहां की कृपा और मुरार पन्त के प्रयत्न से शाहजी कैद से छूट गये और चार वर्ष तक दरबार में रहे।
शिवाजी की गिरफ्तारी का प्रयन्त
जब तक शिवाजी के पिता शाहजी दरबार में रहे शिवाजी ने अपनी कार्यवाही शिथिल रखी। बीजापुर के बादशाह ने कोई कार्यवाही शिवाजी के विरूद्व इस भय से नहीं की कि कहीं समस्त जीता हुआ राज्य दिल्ली के बादशाह को न सौंप दे तो भी बीजापुर का बादशाह शिवाजी की तरफ से
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बेसुध नहीं था। इस बात