अच्छी तरह जानते थे कि यदि ’पूर्णधर’ किला हाथ से जाता रहा तो दक्षिण भारत में हिन्दुओं का नाम निशान तक न रहने पायेगा। इसी लिये अपने प्राणों को हथेली पर लेकर वे प्रत्यक्ष काल बन गये और युद्व में कूद पड़े। थोडे़ समय में लाशों के ढेर लग गये और वे क्षण क्षण में दिलेर खां के समीप पहुंचने लगे। दिलेर खां ने सोचा कि जब तक वीर शिरोमणि जीता रहेगा तब तक उसको आधीन करना या उससे जान बचाना असम्भव हैं निशाने लगा कर तीरों की बौछार शुरू
छत्रपति शिवाजी 79
कर दी। उन तीरों में से एक तीर वीर ’बाजी’ की छाती में जा घुसा और बाजी का प्राणान्त हो गया। बस फिर क्या था, उसके साथियों में खलबली मच गई और उन्होंने ऊपर के किले की ओर मुंह किया। दिलेर खां की सेना ने फिर किले के नीचे के भाग में हमला कर दिया, दिलेर खां की सेना ने फिर किले के नीचे के भाग में हमला कर
की गुप्त चेष्टा हो रही थी कि किसी प्रकार शिवाजी को कैद किया जाय। एक नीच प्रकृति का हिन्दू ’बाजी शामजी’ इस काम को पूरा करने के लिए तत्पर हुआ और जिस इलाके में शिवाजी रहता था वहां ताक में रहने लगा। शिवाजी को इसकी ख़बर लग गई। उसने स्वयं ’बाजी’ और उसके साथियों पर आक्रमण करके जंगल में खदेड़ दिया। जावली के राजा चन्द्रराव ने इस विश्वासघाती को अपने राज्य में होकर जाने दिया था।
शिवाजी ने भरपूर कोशिश की कि राजा को इस बात पर राजी करें कि मुसलमानों के विरूद्व