पर विश्वास करके शिवाजी के अपने की खबर पाई और अपने खेमे से बाहर होकर बड़े आदर के साथ उनसे मिला और अपने खेमे में लाकर अपनी दाहिनी तरफ बैठाया। बड़ा सत्कार आदर किया और उत्साह व र्धर्य से बात करने लगा। दूसरे दिन शिवाजी दिलेर खां से मिलने गये और अपने हाथ से ’पूर्णधर’ किले की सम्पूर्ण तालियां उसे सौंप दी। शिवाजी और जयसिंह के बीच सन्धि की ये शर्ते थी।
(1) जो भूमि मुग़लिया सल्तनत (शाही सरकार) से छीनी थी वह एकदम छोड़ दी जाये।
(2) शिवाजी उन बत्तीस किलों में से जो उन्होंने बनाये थे अथवा छीने थे बीस किले मुग़ल बादशाह को दे देवें और शेष
छत्रपति शिवाजी 81
बारह किले अपने अधिकार में रक्खें। साथ ही जिस किले के साथ जो भूमि जागीर लगी हो वह भी उसी के साथ रहे।
(3) शिवाजी के पुत्र सम्भाजी को जिसकी उम्र 8 वर्ष की थी 5 हजार का पुरस्कार मिले।
’नीर’ अथवा क्रिश्ना (कृष्णा) नदी के किनारे पर जो इलाका शिवाजी का था उसकी रक्षा में नदी के उद्गम पर किला बनाने का काम आरम्भ कर दिया। इस किले का नाम प्रतापगढ़ रखा गया। निदान इस प्रकार अपनी सेना बढ़ाकर और राज्य विस्तार करके शिवाजीी ने बीजापुर से अधिक शक्ति वाली रियासत को हानि पहंुचाने की मन में ठानी।
अध्याय 4
मुगलवंश के विरूद्व शिवाजी की कार्यवाही का आरम्भ
शिवाजी की नवीन कार्यवाही का वृत्तान्त सुनाने के पहले इतिहास की मर्यादा को स्थिर रखने के लिए आवश्यक