(4) शिवाजी को बीजापुर के राज्य पर कुछ अधिकार जागीर का (5 लाख पगोड़ा प्रति वर्ष) प्राप्त हो इन अधिकारों के बदले 3 लाख वार्षिक की किस्त से 40 लाख ’पगोड़ा’ की भेंट शाही कोष में देने की प्रतिज्ञा की गई।
राजा जयसिंह ने इन शर्तो को पूरा करने के लिए अपने ऊपर भार लिया। औरंगजेब ने इसके उत्तर में जो पत्र लिखा था उसमें उसने भी शर्ते स्वीकार की थी। ’देशमुखी’ अधिकार जो चैथी शर्त में था औरंगजेब ने उसका कहीं जिकर भी नहीं किया था। हां, पहली शर्त अवश्य मान ली थी। इनके सिवाय औरंगजेब ने एक शर्त और बढ़ा दी थी कि ’शिवाजी’ के बीजापुर को सर करने में सहायता दंे।
इस शर्त को पूरा करने के लिए शिवाजी दो हजार सवार और आठ हजार पैदल सेना के साथ राजा जयसिंह के साथ बीजापुर को आधीन करने में सम्मिलित हुए। शिवाजी और नेता जी पालकर ने इन लड़ाइयों में वह बहादुरी
है कि संक्षेप में उस चालबाजी का भी जिक्र करें जिसके कारण औरंगजेब हिन्दुस्तान के इतिहास में शतरंजी चालें चल कर पैंतरे बदल रहा था। यहां तक कि अपने पिता बादशाह शाहजहां को हराकर उसने बाजी मार ली थी। प्रायः दिल्ली के समस्त बादशाह दक्षिण की मुसलमानी बादशाहतों को हड़प् करने की फिक्र में रहा करते थे क्योंकि दिल्ली की बादशाहत स्थिर रखने के लिए यह आवश्यक था कि गोलकुण्डा और बीजापुर के बादशाह सदैव कर देते रहें। शाहजहां ने भी इनके विरूद्व कई बार लड़ाइयां की थी और कुछ