विचार करना होगा जिनसे हम इस अधोगति को प्राप्त हुए। फिर यह भी सोचना होगा िकइस समय तक हम अधोगति के गहरे गढ़े में क्यों पड़े हैं, यह और भी दुर्भाग्य की बात है कि मुसलमान लेखकों

12 छत्रपति शिवाजी

के द्वारा लिखी गई पुस्तकों के अलावा हमारे पास कोई दूसरी साम्रगी नहीं है। मुसलमानी इतिहासों में हमें तथा हमारी जाति को कायर सिद्व किया गया है तथा हम पर बेइमानी तथा दगाबाज़ी के लांछन लगाये गये हैं। ये लांछन तो कायरता से भी बढ़कर हैं। कुछ यूरोपियन विद्वानों ने सच्चाई को खोलकर लिखा है और हिन्दुओं की वीरता और गम्भीरता की प्रशंसा भी की है किन्तू कुछ अन्य यूरोपीयन विद्वानों ने मुसलमान लेखकों की हां में हां मिलाई है। ग्रान्ट डफ एक प्रसिद्व इतिहासकार हैं जिन्होंने महाराष्ट्र जाति का इतिहास लिखा है। इसमें उन्होंने हिन्दुओं के बारे में मुसलमानों द्वारा लिखे गये इतिहास को सच माना है। फरिश्ता नामक


15 of 229

जाति की नींव सभ्यता के उच्च स्वरूप पर रखी गई हो, उसके लिए आवश्यक है कि अन्य जातियों के ग्रन्थों का अध्ययन करने की अपेक्षा वह स्वयं के ग्रन्थों का ही परिशीलन करे। यह सब कुछ होने पर भी आर्य जाति का क्रमबद्व इतिहास नहीं है। इस विषय में कुछ लोगों का कहना है कि इतिहासलेखन की ओर हमारे पूर्वजों ने ध्यान नहीं दिया। कुछ अन्यों का ख्याल है कि हमारे अनके ग्रन्थ और उनसे भरे पुस्तकालय नष्ट कर दिये गये । इन बातों में यदि सच्चाई है तो हम बिना संकोच कह सकते हैं कि आर्य


15 of 378