88 छत्रपति शिवाजी

रास्ते में देहान्त हो गया। यदि शिवाजी भी औरंगजेब के हाथ से न निकलते तो अवश्य मारे जाते और औरंगजेब की चाल पूर्ण रूप से सफल होती परन्तु शिवाजी के भाग्य में कुछ और ही होनहार था। जयसिंह शिवाजी की सेवा करते करते मरे, जिसकी मौत से औरंगजेब को अपने विचारों के अनुसार एक बलवान् शत्रु से छुटकारा मिला। परन्तु शिवाजी ने औरंगजेब के हाथ से छुटकारा पाकर एक महान् राज्य की नींव डाली जिसने मुग़ल सल्तनत को भारतवर्ष से उखाड़ फेंका।

जब शिवाजी दिल्ली दरबार को प्रस्थान कर रहे थे तो जयसिंह बीजापुर से मुकाबला कर रहे थे। शिवाजी का एक वीर अफसर तानाजी पालकर इसके साथ था और बड़ी वीरता से अपने स्वामी की तरफ से लड़ रहा था। शिवाजी के देहली से भाग आने पर औरंगजेब ने तानाजी को (जिसको मुसलमान इतिहासकारों ने नत्थूराम नाम से पुकारा है) पकड़ने


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और आगे कोई फल नहीं हुआ अर्थात् कोई विशेष प्रतिज्ञा नहीं हुई। शिवाजी ने ’कोंकण’ प्रान्त पर अधिकार करने के लिए तत्काल तैयारी शुरू कर दी और समुद्र तट के बहुत से स्थानों को अपने अधिकार में कर लिया।

सामुदायिक कार्य के लिए शिवाजी ने कुछ बेड़े बनवाये। 700 पठान सिपाही भी नौकर रखे। शिवाजी की यह इच्छा थी कि मुसलमानों को न नौकर रखा जाये परन्तू ’गामाजी’ नायक ने जो इनके मामा का अत्यन्त बुद्विमान और विश्वस्त नौकर था शिवाजी को समझा बुझा कर सात सौ पठान नौकर रख


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