की आज्ञा दी। ’तानाजी’ कैद करके दिल्ली लाया गया और उसको मुसलमान होने के लिए मजबूर किया गया। उसे जबरदस्ती मुसलमान बनाकर कुल्ली खां नाम दिया गया । इधर ’कुल्ली खां’ अवसर पाकर भाग गया और शिवाजी से जा मिला।
अध्याय 9
शिवाजी का अभ्युदय
दक्षिण पहुंच कर शिवाजी ने फिर उन प्रान्तों को लौटाने का प्रयत्न किया जो उन्होंने मेल मिलाप के समय राजा जयसिंह को दे दिये थे। बहुत से किले तो सुगमता से हाथ आ गये, कई एक के लिए युद्व भी करना पड़ा। परन्तु थोड़े ही समय में सतारा, पनाला और राजगढ़ जैसे प्रसिद्व किले भी वापस आ गये। वह सम्पूर्ण भूमि जो राजा जयसिंह को दी थी पुनः शिवाजी की आधीनता में आ गई। यहां तक कि शिवाजी ने एक बार फिर सूरत पर (जो मुग़लों के अधीन था) धावा किया और लूट मार करके बहुत सा धन प्राप्त किया। जब यह खबर औरंगजेब को मिली तो वह
लिये जो बीजापुर से निकाले हुए सिपाही थे। राघो बल्लाल इन पठानों का नायक नियुक्त किया गया। शिवाजी के मन्त्रियों में सब से उच्च अधिकार शामरावजी पन्त का था। ’कोंकण’ की विजय प्राप्ति के लिए एक बहुत बड़ी सेना एकत्रित करके उसको प्रबन्धकर्ता नियत किया गया, परन्तु
56 छत्रपति शिवाजी
परीक्षा से यह निश्चय हो गया िकवह सेना का नायक होने की योग्यता नहीं रखता है। फलस्वरूप उस नायक को बीजापुर की सेना के सम्मुख हारना पड़ा जिससे शिवाजी को अत्यन्त क्लेश हुआ। यह पहली हार थी