डाला और जो बचे रहे उन्हें औरंगजेब जैसे बलवान् सम्राट् ने खुले तौर पर मार डाला।
अध्याय 10
बीजापुर और गोलकुण्डा राज्य भी शिवाजी को कर देने लगे
ऊपर लिखा जा चुका है कि शाहजी बीजापुर के दरबार में नौकर थे पर शिवाजी ने अपने जीवन में वास्तविक काम आरम्भ किये और हाथ में तलवार लेकर अपने भुजबल की सहायता एवं देश को मुसलमानों के पंजे से छुड़ायें और मरहठा राज्य की नींव डालें। पिछले पृष्ठों में लिखे सम्पूर्ण वृत्तान्तों ने जो शिवाजी की 40 वर्ष की अवस्था तक प्रकट हुए। यह किसको ज्ञात नहीं कि शाहजी का पुत्र शिवाजी इस प्रकार के साहस, वीरता और पुरूषार्थ का सबूत देगा। किन्तु 16 वर्ष के शिवाजी को देख कर किसी मनुष्य को यदि कोई विचार पैदा भी हुआा होगा तो केवल इतना ही कि वह अपने पिता से अधिक बलशाली और महामान्य होगा। कदाचित् किसी का तो यह भी विचार हो कि इस प्रकार
मिल की दूरी पर महाबलेश्वर के मन्दिर के पास हैं। पश्चिम में कोवरी नदी बहती है और उसके तट इस दुर्ग (किले) की रक्षा करते हैं। पश्चिम की ओर ऊंची नीची ज़मीन का पहाड़ी देश है जो कोंकण तक चला गया है और 60 मील के फासले पर जा समुद्र में मिला है। प्रतापगढ़ दुर्गम पहाड़ों की श्रेणी में है जो उत्तर दिशा में है। किले की इमारत भी बड़ी मजबूत है।
58 छत्रपति शिवाजी
दोहरी पक्की दीवारें उसके चारों तरफ हैं और चार मीनारें (बुर्ज) भी हैं।
उत्तरी किले में शिवाजी की