के उजड्डपन की बातें, राजद्रोह, लूट खसोट की आदतें उसके विध्वंस का कारण होंगी परन्तु यह बात तो शायद किसी को भी बुद्वि में न समाई होगी कि 25 वर्ष की अवस्था के पूर्व का एक लड़का एक अच्छे राज्य का स्वामी बनेगा। दिल्ली का मुग़ल दरबार उसके सामने सन्धि की शर्ते पेश करेगा और बीजापुर तथा गोलकुण्डा के वंश उसको कर देना स्वीकार करेंगे। तात्पर्य यह कि थोड़े ही समय में शिवाजी ने जो कुछ कर दिखाया, वह सब लोगों की आशाओं से बढ़ कर था। शिवाजी को कई बार सफलता हुई, साथ ही निष्फलता भी हुई परन्तु निष्फलता सदैव उनके लिए लाभप्रद होती गई वह साहस तथा पुरूषार्थ के ऐसे धनी थे कि कभी निष्फलता में भी हानि

छत्रपति शिवाजी 93

नहीं उठाई। परमात्मा सदा उनकी मदद करता था। उनका भाग्य उत्तम था। उनकी कीर्ति को पताका और जाति का गौरव उनके देश की भाग्यशीलता का निशान था। मैत्री से


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आराध्या देवी का मन्दिर है और ऊपरी भाग में महादेव तथा पार्वती का मन्दिर है। शिवाजी के अपने निवास का स्थान भी इसी में है जो कि थोड़ी ही जगह में हैं। शिवाजी इसी किले के अन्दर थे जिस समय उन्होंने अफ़ज़ल खां की सेना देखी दिल में विचारा कि इस बड़ी सेना से सामना करना निष्फल है। अतएव सन्देशा भेजा और अत्यन्त नम्रता से क्षमा-प्रार्थना की । इस पर अफ़ज़ल खां ने एक गोपीनाथ ब्राह्यण को शिवाजी के पास भेजा कि यदि शिवाजी अफ़ज़ल खां इस बात का जिम्मा ले सकता है कि शिवाजी को बादशाह


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