इस खोज में हमें हिन्दू लेखकों द्वारा लिखे गये कुछ

विज्ञप्ति 13

ऐसे भी इतिहास मिलेंगे जो मुसलमानों द्वारा लिखें गये इतिहासों से भी निम्नकोटी के हैं। कारण कि जिस लेखक ने केवल किसी को खुश करने के लिए ही जो लिखा उसका ध्यान सच्चाई की ओर नहीं रहेगा। उसका ध्यान तो खुद को मिलने वाले पुरस्कार की ओर ही होगा। तथापि कुछ इतिहास लेखक ऐसे भी हैं जो किसी पारितोषिक की परवाह किए बिना लिखते हैं। अंगे्रजी इतिहासकार इसी कोटी में आते हैं और इसके लिए हमक उनके चिर कृतज्ञ रहेंगे। भारत में ऐसा कौन हिन्दू है जो टाॅड साहब द्वारा लिखे गये राजस्थान के इतिहास को पढ़कर उनका कृतज्ञ नहीं होगा। यदि इस देश के राजा अपने पूर्वजों की वीरता की कहानियां पढ़ने का अवसर मिलेगा।

भारत के दक्षिण में एक और जाति है जो सदा अध्ययन में लीन रही और जिसके पास अपनी जाति का इतिहास कई खण्डों में


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जाता है वह अविश्वसनीय तथा पक्षपातयुक्त है। आर्य जाति के इतिहास के अध्ययन में अनके कठिनाइयां उत्पन्न की गई हैं। संस्कृत भाषा में अनेक ग्रन्थ नष्ट हो गये है और यही कारण है कि इतिहास के लेखकों के द्वारा भी अनेक भूलें हुई हैं। जब संस्कृत के लेखकों के द्वारा भी भूलों का होना सम्भव है तो उन लोगों का तो कहना ही क्या, जो इस भाषा को अशिक्षित लोगों की भाषा मानते हैं तथा जिनकी धारणा है कि आर्य जाति ने उन्नति के पथ पर चलना कभी सीखा ही नहीं था।

हिन्दू जाति की उन्नति के बारे में पश्चिम के विद्वानों ने बहुत कुछ लिखा है किन्तू मुसलमान लेखकों का इस ओर


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