है जिसके ऊपर एक दृढ़ पत्थर की त्रिकोण दीवार है, जिसमें स्थान स्थान पर बुर्ज हैं। इस बाहरी दीवार के अन्दर किला है जो बनावट में त्रिभुजाकार है। किले के अन्दर का मण्डल दो मील से भी अधिक है।
किले के ऊपर पूर्व की ओर मनीरा का सुन्दर तथा चित्ताकर्षक पहाड़ी दृश्य है। दक्षिण की ओर एक बड़ा भारी मैदान दिखलाई देता है जिसके अगले भाग में पूना शहर की आबादी देख पड़ती है। उत्तर और पश्चिम की ओर जहां तक दृष्टि जाती है पर्वत दिखाई देते हैं, यहां तक कि आकाश का नीला रंग पहाड़ी बादलों की रंगत में मिल कर धूम समूह बन जाता है, जिसकी ओट में बस्ती अद्श्य हो जाती है। इसके पास पूर्णधर का किला ठीक उस स्थान पर है जहां से पहाड़ी सिलसिले का रूख दक्षिण की ओर घूम जात है । शिवाजी ने प्रत्येक अवस्था को दृष्टिगोचर करके इन दोनों किलों को बनवाया था और जिस समय जयसिंह ने सुलह की
हैं। अतः सम्पूर्ण मरहठा लेख कइस बात पर सहमत हैं कि शिवाजी ने अफ़ज़ल खां स्वयम् उत्कण्ठित था कि शिवाजी को मेल जोल में फंसा कर हनन करे। शिवाजी शरीर से दुबले थे परन्तु अफ़ज़ल खां की मोटाई को कुछ नहीं समझते थे और उन्हें पूर्ण विश्वास था कि यदि अचानक एकाकी मेरे सम्मुख आ भी जायेगा तो मैं उसे कत्ल कर डालंूगा । दरबार से प्रस्थान करते समय अफ़ज़ल खां ने अत्यन्त अभिमान से कहा था कि शिवाजी को ज़रूर पकड़ लाऊंगा। इसी के कारण उसने अपने एक ब्राह्यण को शिवाजी के पास