थी उस समय दोनों किले अभी मुसलमानों ही के हाथ में थे और मुसलमानों की ओर से यहां राजपूत सेना नियत की गई थी इस युद्व में ’तानाजी’ ने जो वीरता एवं साहस अपने बहादुर सिपाहियों के साथ दिखायी उसे उक मराठा कवि ने पद्य में वर्णन किया है। मराठे लोग इस गीत को बड़े प्रेम और स्नेह के साथ गाते हैं। महराष्ट्र का बच्चा बच्चा इस जातीय विजय के इस अद्वितीय गीत से परिचित है। इतिहासकारों तथा इस जातीय गीत में कहीं कहीं विरोध है परन्तु इस गीत में तैयार एवं घेरे की हालत इस विचार से लिखी गई है िकवे सब के सब चित्ताकर्षण एवम् उत्तम उत्तम शिक्षाओं से भरे हैं। हम उनमें से कुछ आवश्यक और बड़ी बातें यहां पर लिखते हैं।
96 छत्रपति शिवाजी
इस किले के घेरे के विषय में यह कथा प्रचलित है कि उसके विजय करने का विचार सब से पहिले शिवाजी की माता जीजाबाई के दिल में पैदा
भेजा था कि वह जाकर शिवाजी को एकाकी मुलाकात करने के लिए उत्साहित करे तथा उसके द्वारा यह भी कहला भेजा कि यदि शिवाजी आधीनता स्वीकार कर लेगा तो उसके लिए बहुत उत्तम होगा। उधर शिवाजी को भी दूत ने यह सब समाचार दिया कि अफ़ज़ल खां की भावना दुष्ट है और उसकी इच्छा है कि किसी तरीके से शिवाजी को फंसाया जाय। अफ़ज़ल खां के दूत (उसी ब्राह्यण) को जब धर्म की सौगन्ध दी गई तो उसने सम्पूर्ण वृत्तान्त सत्य सत्य बखान कर दिया। शिवाजी ने
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सेचा कि भाग्य