लिया और कहा बेटा! टाओ चैसर की बाजी खेली जाय। शिवाजी ने कहा, मुझे इतनी शीघ्रता से क्यों बुलाया गया है? शीघ्र बताइये जिससे आज्ञा का पालन कर सकूं। माता ने एक बार चैसर खेल लें तब बताऊंगी। बेटे ने आज्ञा का पालन धर्म समझ कर कहा बहुत अच्छा। आप पहले पासा डालें। माता ने कहा नहीं बेटा, राजा की विद्यमानता में कोई अगवानी नहीं कर सकता है क्योंकि यह राजपदवी का अधिकार है। मर्यादा के लिए शिवाजी ने पासा डाला और वह अच्छा निकलां शिवाजी ने कहा माता जी मैं हारा और आप विजयी हुई, जो कुछ आज्ञा हो भेंट करूं। किले, माल, धन सब कुछ विद्यमान है जो चाहिए ले लीजिए।
छत्रपति शिवाजी 97
माताजी-बेटा ! न तो तेरे किले की मुझे चाह है न माल धन और न किसी अन्य वस्तु की। केवल एक ही वर मांगती हूं और प्रतिज्ञा करो कि पूर्ण करोगे?
शिवाजी-माताजी अच्छा! अब आज्ञा दीजिए।
माताजी-बेटा!
की इच्छा से अफ़ज़ल खां आगे बढ़ा और पास जाकर शिवाजी का माथा पकड़कर जोर से दबाना आरम्भ किया और झट म्यान से तलवार निकाल शिवाजी पर चलाई, (परन्तु शिवाजी के बदन पर जो सज्जो आदि वस्त्र थे उसके कारण तलवार कुछ कार्य न कर सकी) तो शिवाजी ने अत्यन्त चतुरता के साथ बायें हाथ में लगा हुआ बिछूआ (बघनखा) अफ़ज़ल खां की आंतड़ियों में घुसेड़ दिया। अफ़ज़ल खां वहीं ढेर हो गया। उसका शरीर एक पहाड़ी पर दबा दिया तथा उसके सिर पर एक बुर्ज बनवा दिया जो अब भी वहां