क्मर बांधो, तलवार म्यान से निकालो। यह सिंहगढ़ का किला मेरे नेत्रों में खटक रहा है। उस पर विजय प्राप्त कर माता के हृदय को शान्ति दो। जब तक वह किला फतह न करोगे तब तक तुम्हारा राज्य और तुम्हारी शक्ति अधुरी है। माताजी की यह बात सुन कर शिवाजी पर वज्रपात हुआ, कान्ति उड़ गई। उदासीनता छा गई और कहा-

माताजी ! यह बड़ा कठिन वर है। यह किसका साहस है कि शूरवीर उदयभानु का सामना कर सके। माताजी ! जो कुछ मेरा है वह आप ले सकती हैं परन्तु जो वस्तु मेरी नहीं उसके विषय में मैं कैसे प्रतिज्ञज्ञ कर सकता हूं।

माताजी- (अत्यन्त क्रुद्व होकर) बेटा! याद रक्खो, माता का शाप बहुत बुरा होता है। तेरा सम्पूर्ण राज्य मेरे शाप से भ्रष्ट हो जायेगा, तूने मुझे वचन दिया है सो अब उसका पालन करना तेरा धर्म है।

माताजी की अटल प्रतिज्ञा को सुन कर शिवाजी उठ खड़ा हुआ और आज्ञा


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पर मौजुद है और ’अब्दुल्ला का मीनार’ के नाम से प्रसिद्व है। अफ़ज़ल खां का असली नाम अब्दुल्ला था।

थ्वचार करने से ज्ञात होता है कि मरहठा लेखकों का वर्णन किया हुआ इतिहास इस विषय में ’खाफीकी खां’ के इस लेख की अपेक्षा सत्य और ठीक है। जिसे पढ़ते समय तत्काल निश्चय हो जाता है िकवह पक्षपात-पूर्ण तथा मिथ्या है क्योंकि यह कभी सम्भव नहीं हो सकता िकइस सलूक के पश्चात् (जो कि शिवाजी के साथ दरबार बीजापुर की ओर से काम में आया था और उस विरोध के पश्चात् जिसे शिवाजी ने


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