दी, माताजी के वास्ते पालकी लाओ। पालकी पर आरूढ़ हो माताजी रायगढ़ की ओर रवाना हो गई।
जीजाबाई! तू धन्य है! तेरा गर्व धन्य है! तेरी जैसी माता हो तो शिवाजी जैसा पुत्र क्यों न पैदा हो? तेरी छाती का दूध पिलाने वाली हो तो शिवाजी जैसा शूरवीर हिन्दुओं के खोये हुए गौरव को दुबारा लाकर अपने उन्नत ललाट पर क्यों न राजतिलक लगवाये? तेरी जैसी गोद हो तो शिवाजी जैसा पुत्र केहरी जैसी बेटे ने धर्म की रक्षा की, जाति की रक्षा की, तेरे लिए और अपने लिए यश की धारा बहा दी। हिन्दू इतिहासवेत्ता लिखते हैं कि शिवाजी भवानी का
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पूजक था-और श्रीमती भवानीदेवी ने उसकी पूजा से प्रसन्ना हो उसको वरदान दिया था। सच मानिये तो जीजाबाई ही शिवाजी के लिए जीती जागती भवानीदेवी थीं वे बुद्वि की धनी थी और साहस में भी कम न थी। ऐसी देवी और ऐसा पुजारी धन्य है। देखो, जिस चैसर ने महाभारत
बीजापुर के राज्य के विरूद्व खड़ा किया था) अफ़ज़ल खां शिवाजी पर पूर्ण विश्वास करके मित्र भाव से इस प्रकार अपने आप को शत्रु के हाथ फंसा देता। दरबार बीजापुर ने
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शिवाजी के पिता को कैद करके अत्यन्त दुष्टता का बर्ताव किया था। इसके अतिरिक्त अफ़ज़ल खां इस प्रस्थान तथा आक्रमण के मार्ग में सम्पूर्ण मन्दिरों को विध्वंस तथा नष्ट भ्रष्ट करता आया था । अफ़ज़ल खां ने ही शिवाजी के पुत्र शम्भा जी को धोखेबाजी से कत्ल किया था। यह बात अफ़ज़ल खां को भली प्रकार ज्ञात थी कि