तानाजी ने अपनी सेना को कई भागों में विभक्त करदिया और कई रास्तों से नियत समय पर किले के नीचे पहुंचने की आज्ञा दे दी।
जब सम्पूर्ण सेना यथास्थान किले के नीचे इकट्ठी हो गई तो तानाजी ने एक चादर बिछाकर पान के दस बीड़े डाल दिये और लालकार कर कहा कि कौन ऐसा वीर है जो अपने प्राणों को संकट में डालकर इस किले में जासूसी करने के लिए जा सकता है? निकल आवे और बीड़ा उठा ले। यदि वह कृतकार्य हो गया तो बड़ी भारी जागीर मिलेगी, और मालामाल हो जायेगा परन्तु किसी को साहस न पड़ा कि बीड़ा उठावे। अन्त में तानाजी ने स्वयं बीड़ा उठाया और भेष बदल रवाना हुआ। नाना प्रकार की चालें चल कर और सदर दरवाजे के पहरेदारों को भुलावा देकर किले के भीतर घुस गया और अत्यन्त सुरक्षित स्थान देखकर सेना में लौट आया। रस्सियों की एक सीढ़ी बनाई गई। तानाजी ने फिर पान के बीड़े चादर पर
छत्रपति शिवाजी 63
बहुत सी सम्पत्ति प्राप्त हुई जो तुरन्त राजगढ़ कर दी गई। जब राजा को इस बात का समाचार मिला कि शिवाजी विजय प्राप्त करते हुए और नगरों तथा गावों में अपना अधिकार जमाते हुए सीधे हमारी तरफ आ रहा है तब मुसलमान बादशाहों के कान खड़े होने लगे और वे सामना करने की तैयारियां करने लगे। ’बहशी गुलामसीदी जौहर’ को आज्ञा मिली कि सेना लेकर आगे बढ़े और अफ़ज़ल खां का पुत्र ’फाज़िलखां’ जो अपने पिता का बदला शिवाजी से चुकाना चाहता था उसके सााि