मेरे लड़के को प्यार करना चाचा ने समझा कि भतीजे का दिल नर्म हो गया और वह फिर इस प्रकार डराने लगा। 500 मनुष्यों से उदयभानु का मुकाबला करना व्यर्थ है। उसके पास 1800 वीर हैं और ’चन्द्रावली’ नामक हाथी भी है जो बड़ा भयानक है। इस प्रकार उसके सम्मुख प्राण गंवाने से क्या फायदा है। तानाजी ने उत्तर दिया चाचाजी! ऐसे डरपोकपने से जीवन भर के किये गये सभी कार्याे पर कलंक-कालिमा लग जायेगी। क्षत्रिय के लिए यह धर्म नहीं कि समर में आकर पीछे लौट जाये। अब जो हो सो हो ही कर रहे।
एक इतिहासकार लेखक ने इस प्रकार लिखा है कि तानाजी के साथ ऊपर 300 मनुष्य चढे़ और शेष किसी कारण नहीं चढ़ सके। तानाजी अपने साथियों को लेकर आगे बढ़ा ओर जो मिल गया उसको काटता गया। किले की तमाम सेना में हलच लमच गई। मित्र व शत्रु को पहचानना कठिन हो गया। दोनों ओर की
पास के इलाके की रक्षा के लिए ’मोरोपन्त’ को रखा गया और स्वयं शिवाजी ’पलाना किले’ की रक्षा में कटिबद्व हो गये। शिवाजी ने बीजापुर की सेना को आगे बढ़ने से नहीं रोका परन्तु जब सेना दुर्ग के पास आ डटी तो ’नेता जी पालकर’ ने आसपास की बस्ती उजाड़ना शुरू कर दिया और यत्न किया कि जिससे शत्रु को भोजन सामग्री मिलनी कठिन हो जाये। मावली लोगों ने पर्वतों को घाटियों को छोड़ कर अलग बस्ती बसाई और यदा कदा शत्रु पर आक्रमण कर उनका विध्वंस करने लगे! यद्यपि शिवाजी के साथियों