तलवारें म्यान से खींच ली गई। देखते ही देखते पृथ्वी पर रक्त की धारा बह चली।
उधर किले के भीतर उदयभानु मस्त होकर सो रहा था। जब उसे इस प्रकार की चढ़ाई का समाचार मिला तो बोला कि हाथी और उसके योद्वा महावत क¨ सामने खडा कर द¨ । जब हाथी सामने आया त¨ महावत जो पठान था बड़े अंहकार के साथ डपट कर बोला! कौन है जो इस प्रकार किले में घुस कर शोर मचाता है।
तानाजी-राजा शिवाजी का सेवक तानाजी सूबेदार! यह सुनकर इस पठान को अत्यन्त क्रोध आया और कहने लगा।
छत्रपति शिवाजी 103
पठान-’अरे जाट, चला जा, क्या तेरी बुद्वि पर पत्थर पड़े हैं। बाप और दादा जो काम आये हैं वही तेरा काम है। चला जा हाथ में खुरपा लो और कन्धे पर रस्सी तथा कम्बल डाल कर जंगल में घास काटो और बनिये की दूकान पर बेचो। ये शस्त्र तेरे लिए व्यर्थ हैं इनको फंेक दो।’
ने इस प्रकार शत्रु को अधिक हानि पहंुचाई परन्तु तब भी ’सीदी जौहर’ धैर्य से मैदान में डटा रहा। उधर कोंकण में भी युद्व आरम्भ हो गया जिससे
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मुसलमानों ने कुछ समय तक लाभ उठाया। ’बाजीराव पालकर’ भी ’बारी’ के अध्यक्ष को अपने आधीन न कर सका। इस पिछली लड़ाई में दोनों ओर के अध्यक्ष मारे गये परन्तु सेना ने हार न मानी।
हा शोक! कितने योद्वा और वीर अपने भाइयों के हाथों मोर गये। ऐसा कोई नहीं था जो समझता कि अपने भाइयों का विध्वंस