14 छत्रपति शिवाजी

पर्याय नहीं कहा जा सकता । यदि अंगे्रज जाति में हक्सले और डारविन जैसे दार्शनिकों के होने पर भी वीरता आ सकती है तथा अफलातून प्लेटो अरस्तु, हेगल, शिलर, गेटे, मिल्टन तथा शाॅपनहार जैसे दार्शनिकों और कवियों को उत्पन्न करने वाली जातियों में भी वीर हो सकते हैं तो कोई कारण नहीं कि दार्शनिकों को उत्पन्न करने वाली हिन्दू जाति में वीर न हुए हों। ईसा की इस शिक्षा के रहने पर भी कि ’’कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा भी उसके सामने कर दो।’’

ईसाई जातियां बहादुर रह सकती है और मुसलमान लोग सूफियों के अद्वैतवाद की शिक्षा का प्रचार करते हुए भी वीर और उत्साही रह सकते है तो कोई कारण नहीं कि हिन्दू अपने विज्ञान और दर्शन के कारण अपनी वीरता खो बैठें। यह कहना तो केवल हेत्वाभास है। ऊपर जो कुछ कहा गया वह विपक्षियों के आधार पर कहा गया।


19 of 229

देश का इतिहास लिखा उन्होंने भी स्वंय का अनुसंधान न करके पाश्चात्य विद्वानों का ही अनुसरण किया है। यही कारण है कि हमारा इतिहास अभी तक अधूरा है। हिन्दू सन्तान और हिन्दू विद्यार्थियों का यह कत्र्तव्य है कि वे इस कमी को पूरा करें। जब तक यह कार्य नहीं हो जाता तब तक उपलब्ध अनुसंधान के आधार पर ही ऐसा इतिहास लिखा जाना चाहिए जो पक्षपात शून्य हो और योग्य लेखकों के कठिन परिश्रम का सार हो, जिसे पढ़कर हमारे बच्चें इस बात को जान सकें कि हमारे पूर्वज सभ्यता के किस उच्च शिखर तक पहुंच थे और जहां से वे अधोगति के गर्त में भी गिरे।


19 of 378