ने अपनी सेना को चार भागों में विभक्त कर दिया एक भाग ने आगे होकर लड़ाई शुरू कर दी। दो भाग पीछे होकर ललकारते रहे और चैथा भाग जिसके पास ख़जाना था चुपके से मुग़ल सेना के आगे निकल कर सीधे मार्ग पर आ गया और निःशंक होकर कोंकण को चला गया। शिवाजी ने दाऊद खां का मुकाबला किया और उसे मार भगाया । शत्रु की सेना से मरहठों का समूह एक स्त्री के अधीन युद्व कर रहा था। वह स्त्री शिवाजी के समीप लाई गई। शिवाजी ने बड़े आदर के साथ अच्छे अच्छे पुरस्कारों के सहित उसको उसके घर भिजवा दिया।
दिसम्बर मास में प्रतापराव को आज्ञा मिली कि खानदेश पर धावा करो, खानदेश का इलाका बड़ा आबाद और धनवान् था। प्रतापराव ने बड़े बड़े नगरों को निष्कण्टक किया और रास्ते में गावों के रहने वालों से इस प्रकार के प्रतिज्ञा-पत्र लिखाये कि वे प्रति वर्ष पैदावार का चैथाई भाग
106 छत्रपति शिवाजी
कर अपना रास्ता लिया। इस कार्यवाही में जब ’सीदी जौहर’ की सब तरकीबें खा़क में मिल गई तो वह इस उधेड़बुन में पड़ गया कि वह ’पलाना’ के घेरे पर स्थित रहे अथवा शिवाजी के पीछे जाये। इधर जब बादशाह को यह समाचार मिला तो उसने ’सीदी जौहर’ पर यह दोष लगाया कि उसने शिवाजी से रिश्वत ले ली है जिसे सुनकर वह क्रोध स ेजल उठा और वैसा ही उसने उत्तर लिख भेजा जो बादशाह के लिए बड़ा अनादर सूचक था। अन्त में बादशाह स्वयं युद्व करने के लिए चल पड़ा। पलाना