ने ’इखलासखां’ की आज्ञा से ’सह्यरा’ को जा घेरा। शिवाजी ’ ’सह्यरा’ किले को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे इसलिए ’प्रतापराव’ और ’पन्त’ दोनों को आज्ञा दी कि 2000 सेना लेकर लड़ाई करे और किले को बचावें क्योंकि शिवाजी को यह समाचार मिल गया था कि किले में साम्रगी कम है। किले के पास पठानों ने 2000 घोड़े काट डाले थे। प्रतापराव जब सेना लेकर आगे बढ़ा तो उसने देखा कि इखलास खां बड़े उत्साह और साहस से आक्रमण के लिए आ रहा है। प्रतापराव ठहर गया और जिस समय इखलास खां आगे बढ़ा तो प्रतापराव ने भागना आरम्भ कर दिया। मरहठों को भागता देख कर मुसलमान पीछा करने लगे और छिन्न भिन्न हो गये। बस फिर क्या था, प्रतापराव ने उलट कर पुनः चढ़ाई कर दी जिससे मुग़लों पर अत्यन्त तबाही की मार पड़ी। इस मार काट में मुग़लों के 22 अफसर मारे गये। हजारों मनुष्य कट
कारखाने वाले पकड़ कर कैद कर लिये गये। शिवाजी को इन पर सन्देह हो गया था कि इन्होंने ’पलाना’ के घेरे के समय शत्रुओं को बारूद और गोली की सहायता दी थी। शिवाजी को उस समय यह ध्यान न था कि यही अंगे्रज व्यापारी शीध्र ही भारतवर्ष के स्वामी बन जायेंगे और शिवाजी की सन्तान उनके आधीन एक कर देने वाले साधारण मण्डलेश (राजा) से अधिक कीर्ति वाली न रहेगी।
शिवाजी को यह ध्यान न था कि यवन राज्य के नाश होने से उनकी जाति का कुछ लाभ न होगा किन्तु एक दूसरी ही जाति