जारी किया। इस अवसर पर अंग्रेजों से सन्धियां की गई। इस वर्ष शिवाजी के सिंहासनासीन होने के 15 दिन पश्चात् इनकी पूज्य माता जीजाबाई का देहान्त हो गया। अपने पुत्र शिवाजी को गद्दी पर बैठा कर लगभग सारे दक्षिण का शासक बना कर एवम् अपनी जाति को उच्च गौरव की सीढ़ी पर चढ़ा कर जीजाबाई की आत्मा किसी नये काम के लिए शरीर को त्याग कर चल बसी। इसके पश्चात् एक युद्व पुनः 1675-76 ई. में मुग़लों के साथ शिवाजी को लड़ना पड़ा।

इस युद्व में मुग़लों का अध्यक्ष यद्यपि बड़े साहस के साथ लड़ता रहा तथापि शिवाजी व हेमराव के सामने उसकी एक न चली। इसके बाद शिवाजी ने कई नये किले प्राप्त किये। हेमराव ने नर्मदा और गोदावरी नदी के पार जाकर मुग़ल सल्तनत से अपने को निष्कण्टक किया साथ ही शिवाजी ने ’मुनिवर’ और ’पनाला’ की भूमि को स्वाधीन करके इसकी रक्षा के निमित्त कई नये किले बनवाये।


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68 छत्रपति शिवाजी

मेल कर लिया। इसी बीच ’बाजीघोरपड़े’ का देहान्त हो गया।

’बाजीघोरपड़े’ की मृत्यु का समाचार जिस समय शाहजी (शिवाजी के पिता) ने सुना तो अत्यन्त प्रसन्न हुए। इसी अवसर पर अपने पुत्र शिवाजी से मिलने के निमित्त कर्णाटक से इधर आये। शिवाजी ने जिस समय समाचार सुना तो अपनी श्रद्वा और पितृभक्ति के अनुसार कुछ मीलों आगे चल कर अपने पिता की अगवानी की और घोड़े से उतर कर आदर पूर्वक वन्दना की।


इस समय शिवाजी के पास पचास हजार पैदल


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