अध्याय 12

कर्नाटक की चढ़ाई

दक्षिण देश का संक्षिप्त इतिहास हम प्रथम ही विज्ञप्ति (भूमिका) में लिख चुके हैं। इसके पश्चात् शिवाजी का वृत्तान्त लिखते हुए हम ने यह दर्शाया कि शिवाजी ने कर्नाटक का प्रदेश जीत लिया और वही मण्डल बीजापुराधीश की ओर से शिवाजी को पुरस्कार में मिल गया। सन् 1676 ई. तक हमने शिवाजी की कार्यवाहियों का वर्णन किया।

अब शिवाजी दक्षिण प्रान्त के महान् बलवान सम्राट् बन गये। अब इन्हें याद आया कि अपने पिता की जायदाद से तो कुछ हिस्सा मिला ही नहीं जो दक्षिण में हिन्दू राज्य को सुदृढ़ करने के लिए आधीन मण्डल बन जायें इसलिए पूर्वीय दक्षिण की ओर अपना रूख किया।

कर्नाटक का वृत्तान्त लिखने से पूर्व हम यह लिख देना उचित समझते हैं कि उस समय दिल्ली, बीजापुर और गोलकुण्डा की क्या दशा थी? औरंगजेब का सदा यह विचार बना रहता था कि सारा दक्षिण मुग़लराज्य में मिला


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सेना और सात हजार घुड़सवार सेना थी। चारों तरफ उनकी धाक जमी हुई थी। बीजापुर का राज्य और मुगलिया शासन चक्र तथा पश्चिम का इलाका कम्पायमान हो रहे थे। शिवाजी ने केवल थल संग्राम ही में नहीं अपितू सामुद्रिक संग्राम में भी नाम पैदा कर लिया था। सामुद्रिक संग्राम के लिए उन्होंने एक बहुत बड़ा ’बेड़ा’ बनवाया था और ’कुलावा’ को अपना बन्दरगाह नियत करेक जलमार्ग से भी शत्रु को सताना आरम्भ कर दिया। पुर्तगाल वालों ने तो शिवाजी का लोहा मान कर मित्रता कर ली थी। इसी बीच बीजापुर


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