दहकती प्रचण्ड अग्नि में प्रवेश किया, वह जाति यदि कायर है तो संसार की कोई जाति वीर कहलाने का दावा नहीं कर सकती।
विज्ञप्ति 15
हिन्दुओं की अवनति के काल में भी उनकी धार्मिकता, पवित्रता तथा वीरता के अनेक प्रमाण मिलते हैं। यह तो सत्य है िकइस जाति में समय समय पर अनेक कायर, देशद्रोही, अधर्मी तथा विश्वासघातक भी उत्पन्न हुए, जिन्होंने नितान्त स्वार्थवश अपने धर्म और जाति को दुश्मनों के हाथ बेच डाला किन्तू ऐसे विषम काल में भी, मुसलमानों की अधीनता के काल में भी अनेक शूरवीरों को उत्पन्न कर यदि यह हिन्दू जाति अपने धर्म पर स्थिर रह सकी तो संसार में इसका उदाहरण अन्यत्र कहां मिलेगा? क्या कोई जाति इस्लाम के अन्धे जोश, वीरता और साहस के सामने अपना सिर ऊंचा खड़ा कर रह सकती थी? हजार वर्षो तक ऐसे निर्मम और कठोर शासकों के अधीन रह कर आज भी 20 करोड़ हिन्दू अपने पूर्वजों
विज्ञप्ति 11
और विजय के वृत्तान्त को अतिश्योक्तिपूर्ण ढंग से लिखा जाता था। ये लोग जहां हिन्दुओं के विजय का समाचार लिखते तो उसका कारण चालाकी या चालबाजी बता देते थे। अनेक स्थानों पर हिन्दुओं को काफिर और कमजोर जैसे निन्दास्पद शब्दों से सम्बोधित किया गया है। यदि अंगे्रज जैसी सभ्य जाति के लोग भी अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों तक को न्यौछावर करने वालों को डाकू कहने में नहीं सकुचाते तो इन मुसलमान लेखकों को क्या दोष दें? देशप्रेमी लोगों को दोहरी लड़ाई लड़नी पड़ती है। प्रथम अपनी