ही दिन में ऐसा कमजोर बना दिया कि उनकी आत्मा को शरीर त्यागना पड़ा, जिस शरीर से उन्होंने ऐसे बड़े बड़े काम किये जिससे भारत का इतिहास भरा पड़ा है। खेद है कि वह शिवाजी अपनी थोड़ी आयु में ही इस संसार से चल दिये कुछ आश्चर्य की बात न थी यदि
118 छत्रपति शिवाजी
शिवाजी कुछ दिन और जीवित रहते तो यवन राज्य की पक्की इमारत को और ठोकर लगाते, परन्तु मृत्यु किसी आवश्यक कार्य की प्रतीक्षा नहीं करती है। संसार में यदि कोई ऐसा समय है कि जिससे किन्न्चित् मात्र भी मोहलत नहीं मिलती तो वह मृत्यु है। शिवाजी के इस प्रकार इस अवस्था में परलोकवास से उनकी जाति को जितना दुःख हुआ है उसका अनुमान करना कठिन है।
अध्याय 14
शिवाजी का चालचलन
शिवाजी मर गये और मरना ही सच है परन्तु इसमें सन्देह है कि शिवाजी जैसी महान् आत्माएं बहुत कम संसार में जन्म लेती हैं। ऐसा लड़ाका,
भी एक नये उठते हुए सितारे की उन्नति का अवरोध न कर सका। अवरोध करना तो दूर रहा, शाही सेना के मुकाबले शिवाजी को बहुत से अवसर अपनी वीरता ओर धीरता और बुद्विमत्ता के दिखलाने के मिले। शिवाजी ने अपने शत्रुओं पर यह सिद्व कर दिया कि जो मनुष्य मरने मारने के लिए उद्यत हो वह एक ऐसा बलवान् मनुष्य हो जाता है जिससे बड़े बड़े राज्य भयभीत होते हैं और कभी कभी उजड़ भी जाते हैं। उसने अपने कामों से सिद्व कर दिया कि 16वीं शताब्दी के हिन्दुओं में भी कुछ महाभारत