ऐसा वीर और शत्रु के मुकाबले में अजेय, जिसने जातीय स्वतन्त्रता के लिए युद्व में हजारों घर के चिऱाग (चैपट सुनसान) कर दिये, गांव उजाड़ दिये, सैकड़ो बच्चों को अनाथ कर दिया। जिसने शत्रु से बदला लेने के लिए धोखे व चालबाजी से काम लिया। ऐसे मनुष्य के निजी जीवन पर दृष्टि डालो तो चकित हो जाओगें सच है इस प्रकार की अवस्थाओं को देख कर ही मनुष्य कह उठता है िकवह मनुष्य नहीं, अवतार है। उसके देशीय भाइयों ने भी उसकी इन बातों और विचित्र शक्तियों से उसे अवतार बना दिया। यह विचारने का स्थान है कि शिवाजी ने अपना जीवन कहां से आरम्भ किया और कहां समाप्त किया? जिस समय शिवाजी उत्पन्न हुए थे उसके पिता क्या थे, और उन्नीस वर्ष की आयु में पहला धावा किया था तो क्या हालत थी जब उनकी मृत्यु हुई तो क्या हालत थी? बड़े बड़े इतिहासकारों ने इनकी वीरता और साहस की प्रशंसा की है। औरंगजेब जैसे
और रामायण काल के हिन्दुओं का रक्त शेष था। यद्यपि सामान्यतया उनका रक्त बिगड़ कर सड़ने लग गया था। परन्तु फिर भी जरा सी चोट के लगने से ज्वालामुखी पर्वतों के समान उबल पड़ता था। और प्रमाद में अन्धे होकर बैठे रहें तो मुद्दतों चूं न करें, चाहे इधर की दुनिया उधर हो जाये परन्तु जब एक बार सामना करने की ठान लें तो प्रलय कर दें।
क्रोध से यदि भाल में रेखा हमारे आ पड़े।
शीश पर हो शीश तन पर तन व कर पर कर चढ़े।।
क्ुरते की बाहें यदि चढ़ें, आकाश भी हिल जायेगा।