के धर्म पर स्थिर हैं। आज भी भारत के मुसलमानों में अधिकांश उन हिन्दुओं की ही संतान हैं जिन्हें तलवार के भय या धन के लालच से इस्लाम को स्वीकार करने के लिए मज़बूर किया गया था। हिन्दुओं की वीरता और साथ ही कायरता की यदि तुलना करनी हो तो यूरोपीय देश इटली के इतिहास से तुलना कीजिए। आज हजार वर्ष से अधिक समय हुआ एशिया और तुर्को के ईसाई भी तुर्को के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सके हैं।

सौ वर्ष पूर्व तक एशियायी और यूरोपीयन तुर्को में ईसाइयों की बस्ती का कोई ऐसा भाग नहीं था जो स्वतन्त्र हो। सैकड़ों वर्षो तक ईसाई लोग तुर्को में अपना प्रभुत्व स्थापित नही कर पाये। यह तो सत्य है कि 19 वीं शताब्दी में कुछ यूरोपीयन देशों की सहायता से तुर्को के कुछ हिस्से स्वतन्त्र हो गये थे, तथापि इस देश के किसी भी भाग में स्वतंत्र ईसाई राज्य की स्थापना नहीं हो सकी थी। इसके विपरीत हम भारत में देखते


22 of 229

जाति के अधीन नहीं हो सकती जब तक कि उसमें अपने ही देश के साथ घात करने वाले देशद्रोही पैदा न हो। ऐसे देशद्रोही देश का उद्वार करने वाले लोगों के मार्ग में बाधक बनते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि देशद्रोहियों का बल न बढ़ने पाए ज्यों ही ये सर उठाएं, उनको कुचल दिया जाये। इस प्रकार देश के उद्वारक ऐसे काम भी करते हैं जिससे देशद्रोहियों का विनाश हो। ऐसा करने में उनका स्वार्थ नहीं होता, अपितू वे शत्रु की शक्ति को नष्ट करने के लिए ही ऐसे काम करते हैं। योरोपियन


22 of 378