दूर कर दो। अपने नित्य कर्मों में चित्त लगाओ। अपनी शारीरिक अवस्था पर ध्यान दो और आराम की इच्छा करो। अपनी प्रजा की रक्षा करो। अपने सैनिकों पर अधिकार करो। अपनी प्रजा की रक्षा करो। अपने सैनिकों पर अधिकार जमाओ और अपने कर्मचारियों से यथायोग्य कार्य लेते हुए संसार में यश पैदा करते रहों जब ऐसा होगा तो तुम्हारी कीर्ति और साहस को सुनकर हमारा चित्त शान्त होगा। तुम्हारी इस दशा को देखते हुए हमारा चित्त महान् शोकसागर में डूबा हुआ है। अतएव उठो! क्मर बांध अपनी अवस्था पर ध्यान दो और मेरे चित्त के दुःख को दूर करो। यह आयु तुम्हारे वैराग्य धारण करने के लिए नहीं वरन् बड़े बड़े कार्य करके यश पैदा करने के लिए है। हां वृद्वावस्था का समय तो वैराग्य धारण करने का होता है परन्तु तुमने तो अभी से ही वैराग्य धारण कर लिया है। न मालूम अभी तुमने कौन से काम किये हैं जो अभी से ही शान्त हुए जाते हो। देखना है कि तुम अब क्या करके दिखाते हो?


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ने मक्का जाने वाले एक जहाज को लूट लिया है। औरंगजेब को बड़ा क्रोध आया और उसने शपथ खाई कि जब तक उस टेढ़े नेत्र वाले अभिमानी हिन्दू का सिर न काट लूंगा तब तक चैन नहीं लूंगा। परन्तु ईश्वर की लाला ईश्वर के सिवा कौन जान सकता है क्योंकि न तो औरंगजेब सर्वशक्तिमान् था और न उसे इन बातों का ही ज्ञान था।

अध्याय 7

महाराजा शिवाजी के अन्य कार्य

अगस्त सन् 1665 ई. में शिवाजी फिर अपने शत्रु को परास्त करने के लिए रवाना हुए और पहले ’’पटहव-अहमद नगर’’


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