(7) पण्डितराव- जो राजा का मुख्य पण्डित था। शास्त्रों में उसकी व्यवस्था प्रामाणिक समझी जाती थी।
(8) न्यायाधीश- उससे बाईं ओर न्यायाधीश।
इसमें से कोई ओहदेदार सदा के लिए नियत नहीं था। शिवाजी का सम्पूर्ण इलाका दो प्रकार के हिस्सों में बंटा था। एक पहाड़ी, दूसरा मैदान का था। मैदान का इलाका भिन्न भिन्न प्रान्तों में बंटा हुआ था। शिवाजी के राज्य में एक और रीति थी वह यह कि जो इलाका बराहेरास्त या उसकी
छत्रपति शिवाजी 123
अमलदारी में था ’शिवाजिया’ कहलाता था। जो इलाका मुग़लों के अधीन था परन्तु उसकी आमदनी का चतुर्थाश दिया करता था वह मुग़लिया कहलाता था।
जहां सिर्फ चतुर्थाश से सम्बंध था वहां सिर्फ मालगुजारी का प्रबन्ध रखते थे और बाकी प्रबन्ध से कुछ वास्ता न था। शिवाजी के पास 280 किले थे। प्रथम हम उनके किलों का इन्तजाम (प्रबन्ध) बतलायेंगे। हर एक किले के प्रधान अफसर का
के दृष्टान्त बहुत कम देखे जाते हैं जिनके कारण एसे रात दिन नींद न आती थी। अन्त उसने (औरंगजेब) राजा जयसिंह राजपूत और ’दिलेरखां’ पठान को एक बड़ी फौज के साथ शिवाजी को आधीन करने के लिए भेजा। शिवाजी जब सामुद्रिक कार्यो से वापस आये तो देखते हैं कि अब मुकाबले की ठन गई औरंगजेब ने भी अपने बल की परीक्षा का पूरा इरादा कर लिया है। सम्पूर्ण मित्रों व अफसरों को रायगढ़ के किले में एकत्रित करके विचार करने लगे। एक दिन शिवाजी को सन्देह हो गया कि श्रीमती भवाजीदेवी