नाम हवलदार ािा। उसके नीचे किले की दीवार के हर एक हिस्से के नाम से असिस्टेण्ट थे। इसके सिवाय एक ब्राह्यण क्लर्क (लेखक) किले में रहता था।
जिला और सम्पत्ति सम्बन्धी प्रबन्ध एक ब्राह्यण के आधीन रहता था। सैनिक तथा रसद आदि का प्रबन्ध कमसरियट वाले कर्मचारियों के आधीन था। किले के चारों ओर सफाई आदि के नियम नियन्त्रित थे और जंगली मेहकमों का प्रबन्ध भी उत्तम था।
मैदान का मण्डल- जैसा कि ऊपर कहा गया है कई एक प्रान्तों में विभक्त था। सामान्यतया प्रत्येक प्रान्त की आमदनी एक लाख-सवालाख के लगभग होती थी। प्रत्येक सूबेदार का वेतन 100 के लगभग होता था। कर-प्राप्ति आदि का प्रबन्ध ग्रामीणों एवं ग्रामध्यक्षों के अधीन रहता था। अंगे्रजी सरकार के समान पृथ्वी की नाप का हिसाब सम्पूर्णतया कागजों में लिखा रहता था। दुर्भिक्ष आदि के समय में तकाबी दी जाती और किस्तों में कर वसूल किया जाता था। दीवानी अभियोग ग्रामों की पंचायत के सुपुर्द (अधीन) रहते थे।
(जिसकी वह पूजा करते थे) स्वप्न में यह बतला रही है कि ऐ शिवाजी! तेरे लिए इस हिन्दू सेनापति के सम्मुख विजय प्राप्त होना कठिन है। तू निःसन्देह आज तक मुसलमानों के मुकाबले में विजय प्राप्त करता रहा परन्तु आज तो तेरा ही भाई एक राजपूत तेरे मुकाबले में आ डटा है। शिवाजी! तुमको क्या मालूम था कि मक्कार औरंगजेब ने उसको इसी विचार से भेजा है कि या तो
छत्रपति शिवाजी 77
वह स्वयं रण में मरेगा अथवा मेरा नाश करेगा। सीधा परन्तु वीर राजपूत (जयसिंह) अपनी वीरता