हैं कि कठोर मुसलमानी शासन में भी भारत के उत्तर, पश्चिम तथा मध्य भाग में हिन्दू राज्यों की स्वतन्त्र सत्ता बनी रही। इन हिन्दू राजाओं ने मुसलमानी तलवार की उपेक्षा कर अपनी आजादी को स्थिर रखा।

16 छत्रपति शिवाजी

मुसलमान इतिहास इस बात के साक्षी हैं कि इस्लाम के प्रारम्भिक आक्रमणकारियों को यह विश्वास हो गया था कि उनका मुकाबला एक शक्तिशाला जाति से होने वाला है। यह तो हिन्दुओं की आपस की फूट तथा धर्महीनता ही थी िकवे अपने शत्रु को नीचा नहीं दिखा सके। ग्यारहवीं शताब्दी तक लगातार विदेशी मुसलमान इस देश में लुटेरों की भांति आते रहे और यहां का धन-वैभव लूट कर ले जाते रहे। महमूद ग़जनवी के समय तक भारत के कुछ ही किले ऐसे थे जिन पर मुसलमानों का अधिकार था। इनमें से भी बहुतों को हिन्दुओं ने पुनः अपने अधिकार में ले लिया था। भारत में मुसलमानी शासन की नींव जमाने वाला, प्रथम


23 of 229

सेनापति इन कामों को कत्र्तव्य समझ कर करते हैं, किन्तू अन्य लोग उस कार्यवाही को लूटपाट या डाका डालना कहते हैं। जब आजकल की सभ्य जातियों का यह सच है तो हम मुसलमान लेखकों को क्यों दोष दें?

यह सब तो प्रसंगवश लिखना पड़ा। वास्तविक प्रश्न यह है कि हम अपने अवनति के इतिहास को कहां से पढ़ना शुरू करें? प्रथम तो हमें इन कारणों का विचार करना होगा जिनसे हम इस अधोगति को प्राप्त हुए। फिर यह भी सोचना होगा िकइस समय तक हम अधोगति के गहरे गढ़े में क्यों पड़े हैं, यह और भी दुर्भाग्य की बात है कि मुसलमान लेखकों


23 of 378