बादशाह अकबर था। अकबर का युद्व में मुकाबला करने में महाराणा प्रताप ने जो वीरता, धीरता तथा गम्भीरता दिखाई वह संसार के सामने प्रत्यक्ष है। महाराणा प्रताप को जैसी पराजय मिली वैसी परमात्मा किसी को न दे। आज

विज्ञप्ति 17

कौन ऐसा हिन्दू है जो राणा प्रताप पर गर्व न करता हो? महाराणा सांगा का दुर्भाग्य था कि अपने ही एक सेनापति के कपटाचरण के कारण उन्हें पराजित होना पड़ा। अन्यथा मुसलमानी राज्य की इतिश्री तो तभी हो गई होती। दैवी विधान में किसी का वश नहीं चलता। यह सत्य है कि महाराणा सांगा की पराजय ने दिल्ली के हिन्दू धर्म में कुछ ऐसे परिवर्तन किये जिनके फलस्वरूप कालान्तर में गुरू गोविन्दसिंह और उनके अनुयायियों जैसे वीर पुरूष भारत में पैदा हुए। राजपुतों ने भी अकबर से पहले तक के काल में पूर्णतया राजनैतिक परतन्त्रता स्वीकार नहीं की थी। अकेला राजपूताना ही भारत का इतना विशाल


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महाराष्ट्र जाति का इतिहास लिखा है। इसमें उन्होंने हिन्दुओं के बारे में मुसलमानों द्वारा लिखे गये इतिहास को सच माना है। फरिश्ता नामक इतिहास लेखक लिखता है कि 1871 में पुर्तगालवासियों ने मुसलमानी सेना को शराब को शराब पीलाकर मतवाला बना दिया। ग्रान्ट डफ ठन बातों को झूठा मानते हैं और लिखते हैं कि मुसलमानों को जब हार का सामना करना पड़ा तो उसके मूल में दगाबाज़ी और विश्वासघात ही था। फरिश्ता की विश्विसनीयता कितनी है इसके लिए इस योग्य अंगे्रज लेखक का यह कथन ही काफी है।


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