प्रचण्ड था जिसने मुसलमानी शासन सिंहासन पर मुग़लों के शासन की स्थापना कर दी।

इधर तो दिल्ली का शासन मुगलों के अधिकार में था, उधर पंजाब में एक ऐसे देशभक्त ने जन्म लिया जिसने धर्मप्रचारकों और उपदेशकों के एक ऐसे दल को संगठित किया जिसने मुगल सत्ता का समूल नाश करने का बीड़ा उठाया। जिस समय बाबर ने दिल्ली में मुगल सल्तनत की नींव डाली, उसी समय गुरूनानक ने के बद्वमूल हो जाने के तीन सौ-चार सौ वर्षो बाद तक अपनी आजादी को बरकरार रखा। चार सौ वर्ग मील क्षेत्र वाला उड़ीसा प्रान्त चैदहवीं शताब्दी के अन्त तक स्वतन्त्र रहा। दक्षिण में पश्चिमी घाट का प्रदेश भी स्वतंत्र रहा। 13 वीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी ने सर्वप्रथम दक्षिण पर चढ़ाई की। नर्मदा को पार कर खानदेश होता हुआ देवगढ़ तक बढ़ जाने वाला यही पहला मुसलमान हमलावर था। उस समय इसका चाचा ज़लालुद्दीन खिलजी दिल्ली


26 of 229



ख़ाफी खां एक अन्य लेखक है जिसके लिखे इतिहास से पर्याप्त सहायता ली जा सकती है। उसने जहां भी हिन्दू वीरों की कथा कही उन्हें घृणास्पद शब्दों से सम्बोधित किया। क्या ऐसे इतिहास ग्रन्थों से हम अपने बच्चों को वास्तविकता से परिचित करा सकते है? सच तो यह है कि आजकल जो इतिहास पढ़ाया जाता है वह किसी स्वतन्त्र अनुसंधान के आधार पर नहीं लिखा गया। अतः आवश्यकता इस बात की है कि हिन्दू स्वयम् अपने अनुसंधान के आधार पर अपना इतिहास लिखें और उन पुस्तकों से भी सहायता लें जो सच्चाई को प्रस्तुत करती हैं।


26 of 378