के सिंहासन पर था। अलाउद्दीन ने यों तो यह प्रसिद्व कर रखा था िकवह अपने चाचा के व्यवहार से क्रुद और रूष्ट होकर दक्षिण की ओर जा रहा था, वस्तुतः उसकी इच्छा दक्षिण विजय करने की थी।

18 छत्रपति शिवाजी

उन दिनों दक्षिण प्रान्त की राजधानी देवगढ़ थी। देवगढ़ का राजा रामदेव राय चुपचाप चैन की बंशी बजा रहा था। उसकी सेना तथा साजसामान अस्तव्यस्त थे। उसकी रानियां तथा बच्चे तीर्थ यात्रा पर निकले हुए थे। जब रामदेव राय ने सुना कि अलाउद्दीन ने राजधानी को अपनी सेना से घेर लिया है तो वह अपने साधारण नौकरों को एकत्र कर आक्रमणकारी का मुकाबला करने का विचार करने लगा, परन्तू ये लोग कब तक शत्रु सेना के सामने टिक पाते? राजा अपने बचाव के लिए एक दूसरे पहाड़ी किले में जा छिपा यह मौका पाकर युवराज अलाउद्दीन खिलजी किले में घुस कर लूटपाट करने लगा और प्रचारित कर दिया


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इस खोज में हमें हिन्दू लेखकों द्वारा लिखे गये कुछ

विज्ञप्ति 13

ऐसे भी इतिहास मिलेंगे जो मुसलमानों द्वारा लिखें गये इतिहासों से भी निम्नकोटी के हैं। कारण कि जिस लेखक ने केवल किसी को खुश करने के लिए ही जो लिखा उसका ध्यान सच्चाई की ओर नहीं रहेगा। उसका ध्यान तो खुद को मिलने वाले पुरस्कार की ओर ही होगा। तथापि कुछ इतिहास लेखक ऐसे भी हैं जो किसी पारितोषिक की परवाह किए बिना लिखते हैं। अंगे्रजी इतिहासकार इसी कोटी में आते हैं और इसके लिए हमक उनके चिर कृतज्ञ


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