उसके अनुवर्ती बन गये। आप इतिहास के किसी ग्रन्थ को देखें उसमें आपको इन दो तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख मिलेगा-
1. अकबर द्वारा हिन्दुओं को खुश रखने के कारण ही उसे सफलता मिली। 2. हिन्दू सैनिकों ने अपनी वीरता और पराक्रम से मुगल शासन को सुदृढ़ बनाया। अकबर के युद्वों में राजपूत वीरों का बहुत बड़ा योगदान रहा। अकबर ने अपनी बड़ी बड़ी लड़ाइयां हिन्दू सेनापतियों के सहयोग से जीतीं। बीरबल स्वयम् अकबर के पक्ष में लड़ता हुआ मारा गया। अकबर के सहयोगी राजपुतों ने काबुल पर विजय प्राप्त की। कुछ समय तक काबुल में अकबर का एक प्रतिनिधि राजपूत रहता रहा। राजपूतों ने अकबर को जो सहयोग दिया उसका प्रमुख कारण यह था कि बादशाह ने इन राजपुत राजाओं को अपने राज्यों पर शासन करने की छुट दे रखी थी।
अकबर के पश्चात् जब जहांगीर गद्दी पर बैठा तो उसने अपने पिता के नियमों
पर कहा गया। उनकी राय हमारे लिए इसलिए लाभदायक है क्योंकि उन पर हमारे पक्षपाती होने का आरोप तो कदापि नहीं लग सकता। जो जाति अपने पतन के युग में भी राजा कर्ण, गोरा और बादल, महाराणा सांगा और प्रताप, जयमल और फत्ता, दुर्गादास और शिवाजी, गुरू अर्जुन, गुरू तेग बहादुर, गुरू गोविन्दसिंह और हरिसिंह नलवा जैसे हजारों शूरवीरों को उत्पन्न कर सकती है उस आर्य हिन्दू जाति को हम कायर कैसे मान लें? जिस देश को स्त्रियों ने आरम्भ से आज तक श्रेष्ठ उदाहरणों को प्रस्तुत