को जारी रखा। शाहजहां ने भी हिन्दुओं की सहायता से ही राजगद्दी प्राप्त की किन्तु उसने अपने दादा अकबर की नीति को कुछ बदल डाला। शाहजहां के समय तक देश में मजहब के नाम पर पक्षपात की बहुत कम घटनाएं हुई। शाहजहां के दरबार में राजपुतों का वर्चस्व था और वे सम्मान प्राप्त कर चुके थे। यह शाहजहां के समय की बात है कि उसके एक बहुत बड़े मुसलमान सरदार मौहम्मत खां ने
विज्ञप्ति 21
अमरसिंह राठौर का अपमान करना चाहा। मौहम्मत खां को इस बात का घमण्ड था कि बादशाह का उससे पारिवारिक सम्बम्ध है तथापि अमरसिंह ने भरे दरबार में मौहम्मत खां का सिर धड़ से अलग कर दिया। खुद बादशाह महलों में जा छिपा। इसके बाद शाही गद्दी पर औरंगजेब बैठा तो सत्ता प्राप्त करने के लिए उसने अपने भाइयों का खून किया, बाप को कैद में डाला और इस्लामी कट्टरता को पुनः जागृत किया। परिणाम
किया है, जहां सैकड़ों स्त्रियों ने अपने हाथों से अपने भाइयों, पतियों और पुत्रों की कमर में शस्त्र बांधे और उनको युद्व में भेजा, जिस देश की अनेक स्त्रियों ने स्वयं पुरूषों का वेश धारण कर अपने धर्म व जाति की रक्षा के लिए युद्व क्षेत्र में लड़ कर सफलता पाई, अपनी आंखों से एक बंूद भी आंसू नहीं गिराया, जिन्होंने अपने पातिव्रत धर्म की रक्षा के लिए दहकती प्रचण्ड अग्नि में प्रवेश किया, वह जाति यदि कायर है तो संसार की कोई जाति वीर कहलाने का दावा नहीं कर सकती।
विज्ञप्ति 15
हिन्दुओं