सामान्य व्यक्ति को राज्याधिकार देकर बादशाह बना दिया। इसने अपने वंश का नाम बहमनी रखा। जाफर खां कभी किसी समय किसी ब्राह्यण के यहां काम कर चुका था इसलिए इसने अपने खजाने का स्वामी इसी ब्राह्यण को बना दिया। बहमनी वंश के राजाओं ने हिन्दुओं के साथ अच्छा व्यवहार किया। राज्य के समस्त पहाड़ी किलों का अधिकार हिन्दू सेना और हिन्दू सेनापतियों को दे दिया। इसके बाद दिल्ली के सुल्तान ने बहमनी सेना को पराजित कर दिया। सुलतान अलाउद्दीन के सेना नायक ने एक हिन्दू राजा को
22 छत्रपति शिवाजी
पराजित कर उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा। जब राजा इसके लिए सहमत नहीं हुआ तो हिन्दुओं की प्रबल सेना ने मुसलमानी सेना के सात सौ सिपाहियों को मार कर अपने धर्म की रक्षा की। अब बहमनी राज्य भी पतन की ओर बढ़ चला और इसके स्थान पर पांच मुसलमान बादशाहों ने अपने स्वतन्त्र राज्य स्थापित कर
अन्धे जोश, वीरता और साहस के सामने अपना सिर ऊंचा खड़ा कर रह सकती थी? हजार वर्षो तक ऐसे निर्मम और कठोर शासकों के अधीन रह कर आज भी 20 करोड़ हिन्दू अपने पूर्वजों के धर्म पर स्थिर हैं। आज भी भारत के मुसलमानों में अधिकांश उन हिन्दुओं की ही संतान हैं जिन्हें तलवार के भय या धन के लालच से इस्लाम को स्वीकार करने के लिए मज़बूर किया गया था। हिन्दुओं की वीरता और साथ ही कायरता की यदि तुलना करनी हो तो यूरोपीय देश इटली के इतिहास से तुलना कीजिए। आज