लिये। ये थे-1.बरार, 2. बीजापुर, 3. गोलकुण्डा, 4. बीदर, और 5. अहमद नगर। समय के परिवर्तन से ये पांच राज्य तीन बनकर रह गये- बीजापुर, गोलकुण्डा और अहमदनगर। बीजापुर पर आदिलशाही बादशाहों का राज्य रहा और अहमदनगर निजामशाही के नाम से प्रसिद्व हुआ। इसका संस्थापक अहमद नामक व्यक्ति था जिसका बाप ब्राह्यण था और जो बीजापुर में रहता थां अहमद का यह ब्राह्यण पिता एक युद्व में बीजापुर वालों के हाथ पड़ गया और जबरदस्ती मुसलमान बना दिया गया। मुसलमान बन जाने पर इसका अधिकार इतना बढ़ा कि यह बीजापुर रियासत का सर्वोच्च शासक बन गया। इसके बेटे ने बीजापुर के बादशाह से विरोध किया, नई राजधानी कायम की और उसका नाम अहमदनगर रखा। बीजापुर और अहमदनगर दोनों राज्यों की नीति अकबर की नीति के समान थी। दोनों का शासन प्रबन्घ हिन्दुओं के हाथ में था
हजार वर्ष से अधिक समय हुआ एशिया और तुर्को के ईसाई भी तुर्को के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सके हैं।
सौ वर्ष पूर्व तक एशियायी और यूरोपीयन तुर्को में ईसाइयों की बस्ती का कोई ऐसा भाग नहीं था जो स्वतन्त्र हो। सैकड़ों वर्षो तक ईसाई लोग तुर्को में अपना प्रभुत्व स्थापित नही कर पाये। यह तो सत्य है कि 19 वीं शताब्दी में कुछ यूरोपीयन देशों की सहायता से तुर्को के कुछ हिस्से स्वतन्त्र हो गये थे, तथापि इस देश के किसी भी भाग में स्वतंत्र ईसाई राज्य की स्थापना नहीं हो सकी थी। इसके विपरीत